Knowledgebeemplus

जीव और समष्टियाॅं

जीव और समष्टियाॅं

जीव और समष्टियाॅं

जीव और समष्टियाॅं

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1. निम्नलिखित में से किसके लेग्यूम वर्ग के पौधों की जड़ ग्रन्थिकाओं से सहजीवी सम्बन्ध होते हैं ?
( क ) राइजोबियम
( ख ) ऐजोटोबैक्टर
( ग ) स्यूडोमोनास
( घ ) ये सभी

प्रश्न 2. ऐसी पारस्परिक क्रिया जिसमें एक जाति को लाभ होता है और दूसरी को न लाभ होता है न हानि , उसे कहते हैं-

( क ) अंतरजातीय परजीविता
( ख ) सहभोजिता
( ग ) सहोपकारिता
( घ ) स्पर्धा

प्रश्न 3. लाइकेन्स में फंगस तन्तु पोषण प्राप्त करते हैं।
( क ) वायु से
( ख ) शैवाल से
( ग ) मिट्टी के कार्बनिक पदार्थों से
( घ ) उपर्युक्त में से कोई नहीं

For Complete Preparation of English for Board Exam please Visit our YouTube channel –
https://www.youtube.com/c/Knowledgebeem

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. शीत निष्क्रियता ( हाइबर्नेशन ) से उपरति ( डायपाज ) किस प्रकार भिन्न है ?
उत्तर- शीत निष्क्रियता ( Hibernation ) – यह इक्टोथर्मल या शीत निष्क्रिय जन्तुओं ( cold – blooded animals ) , जैसे — एम्फिबियन्स तथा रेप्टाइल्स की शरद नींद ( winter sleep ) है जिससे वे अपने आपको ठंड से बचाते हैं । इसके लिए वे निवास स्थान , जैसे —- खोह , बिल , गहरी मिट्टी आदि में रहने के लिए चले जाते हैं । यहाँ शारीरिक क्रियाएँ अत्यधिक मन्द हो जाती हैं । कुछ चिड़ियाँ एवं भालू के द्वारा भी शीत निष्क्रियता सम्पन्न की जाती है ।
उपरति ( Diapause ) – यह निलंबित वृद्धि या विकास का समय है । प्रतिकूल परिस्थितियों में झीलों और तालाबों में प्राणिप्लवक की अनेक जातियाँ उपरति में आ जाती हैं जो निलंबित परिवर्धन की एक अवस्था है ।

प्रश्न 2. अगर समुद्री मछली को अलवणजल ( फ्रेशवाटर ) की जलजीवशाला ( एक्वेरियम ) में रखा जाता है तो क्या वह मछली जीवित रह पाएगी ? क्यों और क्यों नहीं ?
उत्तर- अगर समुद्री मछली को अलवणजल ( freshwater ) की जल – जीवशाला में रखा जाए तो वह परासरणीय समस्याओं के कारण जीवित नहीं रह पाएगी तथा मर जाएगी । तेज परासरण होने के कारण रक्त दाब तथा रक्त आयतन बढ़ जाता है जिससे मछली की मृत्यु हो जाती है ।

प्रश्न 3 . अधिकतर जीवधारी 45 ° सेंटीग्रेड से अधिक तापमान पर जीवित नहीं रह सकते । कुछ सूक्ष्मजीव ( माइक्रोब ) ऐसे आवास में जहाँ तापमान 100 ° सेंटीग्रेड से भी अधिक है , कैसे जीवित रहते हैं ?
उत्तर- सूक्ष्मजीवों में बहुत कम मात्रा में स्वतन्त्र जल रहता है। शरीर से जल निकलने से उच्च तापक्रम के विरुद्ध प्रतिरोध उत्पन्न होता है । सूक्ष्मजीवों की कोशाभित्ति में ताप सहन अणु तथा तापक्रम प्रतिरोधक एंजाइम्स भी पाए जाते हैं ।

प्रश्न 4. समष्टि ( पॉपुलेशन ) और समुदाय ( कम्युनिटी ) की परिभाषा दीजिए ।
उत्तर – समष्टि ( Population ) – किसी खास समय और क्षेत्र में एक ही प्रकार की स्पीशीज के व्यष्टियों या जीवों की कुल संख्या को समष्टि कहते हैं ।
समुदाय ( Community ) किसी विशिष्ट आवास स्थान की जीव समष्टियों का स्थानीय संघ समुदाय कहलाता है ।

Our Mobile Application for Solved Exercise – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.knowledgebeem.online

प्रश्न 5 , मरुद्भिद् पौधों में कांटे किसका रूपान्तरण हैं ? उत्तर- मरुद्भिद् पौधों ( जैसे – नागफनी ) में कांटे पत्तियों के रूपान्तर हैं ।

प्रश्न 6. रात्रि के समय नागफनी ( Opuntia ) के पौधे में कौन – सा अम्ल बनता है ?
उत्तर- मैलिक अम्ल ।

प्रश्न 7. उत्पादक तथा अपघटक में अंतर कीजिए।
उत्तर- उत्पादक हरे पौधे होते हैं , जो प्रकाश – संश्लेषण द्वारा भोज निर्माण करते हैं । अपघटक के अन्तर्गत सूक्ष्म जीव जैसे जीवाणु एवं क आते हैं जो मृत पौधों एवं जन्तुओं का अपघटन करते हैं ।

प्रश्न 8. किन्हीं दो बाह्योष्मी प्राणी के नाम लिखिए ।
उत्तर- 1. छिपकली , 2. मेंढक ।

प्रश्न 9. ऑर्किड पौधा , आम के पेड़ की शाखा पर उग रहा है। ऑफ़टका और आम के पेड़ के बीच पारस्परिक क्रिया का वर्णन आप कैसे करेंगे?
उत्तर- ऑर्किड पौधा तथा आम के पेड़ की शाखा सहभोजिता प्रदष्टि घ और दूसरी जाति को न लाभ और न हानि होती है । आम की शाखा प अधिपादप के रूप में उगने वाले ऑर्किड को लाभ होता है जबकि आम प्रभावित हो पेड़ को उससे कोई लाभ नहीं होता ।

To prepare notes please install our Mobile App – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.knowledgebeemplus.online

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. वनस्पति समूह को प्रभावित करने वाले किन्हीं दो पारिस्थितिक कारकों का उल्लेख कीजिए ।
उत्तर- वनस्पति समूह को प्रभावित करने वाले दो पारिस्थितिक कारक निम्न हैं—
( i ) जलवायु सम्बन्धी कारक – इसके अन्तर्गत प्रकाश , तापमान , जल , वर्षा जल , वायमुण्डलीय गैसें , वायुमण्डलीय आर्द्रता आदि का वनस्पति समूहों पर प्रभाव के बारे में अध्ययन किया जाता है । –
( ii ) स्थलाकृतिक कारक – इसके अन्तर्गत समुद्र की सतह से ऊँचाई , पर्वतों तथा घाटियों की दिशा , ढलान की प्रवणता , आदि कारक आते है जो जल – वायवीय कारकों के साथ कार्य करते हैं ।

प्रश्न 2. उन गुणों को बताइए जो व्यष्टियों में तो नहीं पर समष्टियों में होते हैं ।
उत्तर- समष्टि ( population ) में कुछ ऐसे गुण होते हैं जो व्यष्टि ( individual ) में नहीं पाए जाते । जैसे व्यष्टि जन्म लेता है , इसकी मृत्यु होती है , लेकिन समष्टि की जन्मदर ( natality ) और मृत्युदर ( mortality ) होती है । समष्टि में इन दरों को क्रमशः प्रति व्यष्टि जन्मदर और मृत्युदर कहते हैं । जन्म और मृत्युदर को समष्टि के सदस्यों के सम्बन्धों में संख्या में वृद्धि का ह्रास ( increase or decrease ) के रूप में प्रकट किया जाता है ।
समष्टि की दूसरी विशेषता लिंग अनुपात अर्थात् नर एवं मादा का अनुपात सामान्यतया समष्टि मे यह अनुपात 50 : 50 होता है . लेकिन इसमें भिन्नता भी हो सकती है जैसे – समष्टि मे 60 प्रतिशत मादा और 40 प्रतिशत नर है। निर्धारित समय में समष्टि भिन्न आयु वाले व्यष्टियों से मिलकर बनती है । यदि समष्टि के सदस्यों की आयु वितरण को आलेखित ( plotted ) किया जाए तो इससे बनने वाली संरचना आयु पिरॅमिड ( age pyramid ) कहलाती है । पिरैमिड का आकार समष्टि की स्थिति को प्रतिबिम्बित करता आप कैसे सजातीय , अन्तर्जातीय प्रतिस्पर्धा , पीड़कनाशी , वातावरणीय कारकों आदि से ऑर्किसमष्टि का आकार आवास में उसकी स्थिति को स्पष्ट करता है । यह है
( i ) क्या यह बढ़ रहा है ,
( ii ) स्थिर है या
( iii ) घट रहा है ।
समष्टि का आकार आवास में उसकी स्थिति को स्पष्ट करता है। यह सजातीय, अन्तर्जातीय प्रतिस्पर्धा, पीड़कनाशी, वातावरणीय कारको आदी से प्रभावित होता है । इसे तकनीकी भाषा में समष्टि घनत्व से स्पष्ट करते हैं । समष्टि घनत्व का आकलन विभिन्न प्रकार से किया जाता है । किसी जाति के लिए समष्टि घनत्व ( आकार ) निश्चित नहीं होता । यह समय – समय पर बदलता रहता है । इसका कारण भोजन की मात्रा , परिस्थितियों में अन्तर , परभक्षण आदि होते हैं । समष्टि की वृद्धि चार कारकों पर निर्भर करती है जिनमें जन्मदर ( natality ) और आप्रवासन ( immigration ) समष्टि में वृद्धि करते हैं , जबकि मृत्युदर ( death rate – mortality ) तथा उत्प्रावसन ( emigration ) इसे घटाते हैं । यदि आरम्भिक समष्टि No है . Nt एक समय अन्तराल है तथा बाद की समष्टि है तो

Nt = No + ( B + I ) – ( D + E )
= No + B + I – D – E
समीकरण से स्पष्ट है कि यदि जन्म लेने वाले ‘B’ संख्या + अप्रवासी ‘I’ की संख्या
(B + I) मरने वालों की संख्या ‘D’ + उत्प्रवासी ‘E’ किस संख्या से अधिक है तो समष्टि घनत्व बढ़ जाएगा अन्यथा घट जाएगा।

Active and Passive Voice – https://knowledgebeemplus.com/active-voice-into-passive-voice/

प्रश्न 3. निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए –
( क ) मरुस्थलीय पादपों और प्राणियों का अनुकूलन ,
( ख ) जल की कमी के प्रति पादपों का अनुकूलन ,
( ग ) प्राणियों में व्यावहारिक
( घ ) पादपों के लिए प्रकाश का ( बिहेवियोरल ) अनुकूलन , महत्त्व ,
( ङ ) तापमान और जल की कमी का प्रभाव तथा प्राणियों का अनुकूलन ।
उत्तर – ( क ) 1. मरुस्थलीय पादपों के अनुकूलन इस प्रकार हैं-
( i ) इनकी जड़ें बहुत लम्बी , शाखित , मोटी एवं मिट्टी के नीचे अधिक गहराई तक जाती हैं ।
( ii ) इनके तने जल – संचय करने के लिए मांसल और मोटे होते हैं ।
( iii ) रन्ध्र स्टोमैटल गुहा में धँसे रहते हैं ।
( iv ) पत्तियाँ छोटी , शल्कपत्र या काँटों के रूप में परिवर्तित हो जाती हैं ।
( v ) तना क्यूटिकिल युक्त तथा घने रोम से भरा होता है ।
2. मरुस्थलीय प्राणियों के अनुकूलन इस प्रकार हैं—
( i ) मरुस्थल के छोटे जीव , जैसे — चूहा , साँप , केकड़ा दिन के समय बालू में बनाई गई सुरंग में रहते हैं तथा रात को बिल से बाहर निकलते हैं ।
( ii ) कुछ मरुस्थलीय जन्तु अपने शरीर के मेटाबोलिज्म से उत्पन्न जल का उपयोग करते हैं । उत्तरी अमेरिका के मरुस्थल में पाया जाने वाला कंगारू चूहा जल की आवश्यकता की पूर्ति अपनी आन्तरिक वसा के ऑक्सीकरण से करता है । ( iii ) जन्तु प्राय : सूखे मल का त्याग करता है ।
( iv ) फ्रीनोसोमा तथा मेलोच होरिडस में काँटेदार त्वचा पाई जाती है ।
( ख ) जल की कमी के प्रति पादपों में अनुकूलन – ये मरुस्थलीय पादप कहलाते हैं । अत : इनका अनुकूलन मरुस्थलीय पादपों के समान होगा ।
( ग ) प्राणियों में व्यावहारिक अनुकूलन इस प्रकार हैं—
( i ) शीत निष्क्रियता , ( ii ) ग्रीष्म निष्क्रियता ,
( iii ) सामयिक सक्रियता , ( iv ) प्रवास आदि ।
( घ ) पादपों के लिए प्रकाश का महत्त्व इस प्रकार है-
( i ) ऊर्जा का स्रोत , ( ii ) दीप्तिकालिक आवश्यकता , ( iii ) वाष्पोत्सर्जन , ( iv ) पुष्पन , ( v ) पादप गति , ( vi ) पिग्मेंटेशन , ( vii ) वृद्धि ( viii ) कंद निर्माण आदि ।
( ङ ) 1. तापमान में कमी का प्रभाव तथा प्राणियों का अनुकूलन इस प्रकार है-
( i ) शीत निष्क्रियता , ( ii ) सामयिक सक्रियता , ( iii ) प्रवास आदि ।
2. जल की कमी का प्रभाव तथा प्राणियों का अनुकूलन इस प्रकार है—
( i ) सूखे मल का त्याग करना । ( ii ) अपने शरीर के मेटाबोलिज्म से उत्पन्न जल का उपयोग करना । ( iii ) सूखे वातावरण को सहने की क्षमता ( iv ) उत्तरी अमेरिका के मरुस्थल में पाया जाने वाला कंगारू चूहा जल की आवश्यकता की पूर्ति अपने आन्तरिक वसा के ऑक्सीकरण से करता है ।

Our Telegram Channel – https://t.me/Knowledgebeem

For Complete Preparation of English for Board Exam please Visit our YouTube channel –
https://www.youtube.com/c/Knowledgebeem

Our Mobile Application for Solved Exercise – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.knowledgebeem.online

Visit Our Website –
https://www.knowledgebeem.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *